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अलविदा 2017 – राजनीति के लिए बदलावों का बरस!

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भारत की राजनीति के लिए यह साल ऐतिहासिक रहा। पूरे साल नरेंद्र मोदी छाये रहे वहीँ गुजरात विधान सभा चुनाव में भाजपा के जीत के बावजूद राहुल गाँधी चर्चा में बने रहे।

1. भाजपा की धुआंधार चुनावी जीत का रिकॉर्ड बरकरार

भाजपा ने साल के शुरुआत में ही उत्तराखंड और गोवा के विधान सभा चुनावों में जीत का परचम लहरा दिया, साथ ही उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में असाधारण जीत के साथ देश की राजनीति में मजबूती से काबिज़ रहे। साल के जाते – जाते गुजरात और हिमाचल विधान सभा चुनाव में भी पार्टी ने जीत का रिकॉर्ड बरकरार रखा।

2. योगी आदित्यनाथ- उत्तर प्रदेश के महंत मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनावी नतीजों के बाद भाजपा ने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर गोरखधाम मठ के महंत आदित्यनाथ के नाम की घोषणा कर सबको चुका दिया था। बीजेपी ने 325 से सीटें जीतीं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए 2017 बेहतरीन रह। साल 2017 को आप उनके राजनीतिक करियर का टर्निंग प्वाइंट भी कह सकते हैं।

3. भाजपा के साथ नीतीश कुमार

सियासत का सबसे बड़ा सत्य सत्ता है। शायद यही वजह है कि राजनीति का ऊंट कब किस करवट बैठ जाये इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। देश में नरेंद्र मोदी के इतर गैर भाजपा दलों के बीच नीतीश प्रमुख चेहरा बनकर उभर रहे थे। राजनीतिक पंडित 2019 के लोकसभा चुनावों में नीतीश को नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती मान रहे थे। पर सियासत के रंग देखिये बेहद नाटकीय घटनाक्रम में न केवल नीतीश ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व लालूप्रसाद यादव की RJD और कांग्रेस के साथ मिलकर बनाए गए महागठबंधन को भी तोड़ दिया।


नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग होते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल हो गए और राज्य में BJP के साथ मिलकर सरकार बना ली, और एक बार फिर मुख्‍यमंत्री बन गए।

4. राहुल का उभार

काफी लम्बे समय तक राहुल गांधी के बारे में ये कयास लगाया जाता रहा कि वह अध्यक्ष पद संभालेंगे या नहीं , आखिरकार उन्होंने यह पद स्वीकार किया।
वह कांग्रेस के अध्यक्ष बने और दूसरा सियासत में उन्हें मोदी के खिलाफ एक मजबूत विपक्षी नेता के तौर पर उभार दिया।


गुजरात चुनाव उनके लिए ‘संजीवनी बूटी’ साबित हुई और निरस हो चुके उनके राजनीतिक कैरियर में नया रंग और उत्साह भर दिया। उन्होंने पिछले चुनावों के उलट गुजरात में रहकर न सिर्फ लगातार प्रचार किया बल्कि लोगों से मिलते रहे और जनता का समर्थन हासिल करने के लिए वो सब कुछ किया जो एक मंझे हुए राजनेता करते हैं। गुजरात विधान सभा चुनाव के परिणाम ने भी राहुल की नेतृत्व छमता को बल दिया।

5. लालूप्रसाद यादव फिर जेल पहुंचे :

साल के अंतिम दिनों में बिहार के दिग्गज नेता लालूप्रसाद यादव चारा घोटाले के एक मामले में अदालत द्वारा दोषी पाए जाने के बाद जेल भेज दिए गए।


देश को हिला कर रख देने वाले बिहार के चर्चित चारा घाटोला मामले में रांची की विशेष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दे दिया, बिहार में सियासत अभी उबाल पर है। लालू के बेटे और पूर्व उपमुख्‍यमंत्री तेजस्‍वी यादव मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर आरोप लगा रहे हैं।

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