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जानिये भारत में कितने प्रकार के लोन दिए जाते है

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भारत में लगभग 12 प्रकार के लोन दिए जाते है, लेकिन सभी Loans की प्रक्रिया एवं सभी Bank की लोन देने की प्रक्रिया अलग अलग है। सभी बैंकों के ब्याज दर एवं Terms and Conditions भी अलग अलग है। भारत में बैंकों के आलावा कई Finance services भी है जो बैंकों की तरह लोन देते है। लेकिन इन फाइनांस सर्विसेस का Rate of interest बैंकों से थोडा अधिक होता है, इन से बिना पूंजी रखे लोन नहीं मिलता है।

भारत में लोन के प्रकार  (Types of Loan)

  1. पर्सनल लोन
  2. गोल्ड लोन
  3. प्रॉपर्टी लोन
  4. होम लोन
  5. एजुकेशन लोन
  6. वाहन लोन
  7. कॉर्पोरेट लोन
  8. शेयर लोन
  9. प्रोजेक्ट लोन
  10. बिज़नेस लोन
  11. फिक्स्ड Deposit लोन
  12. मुद्रा लोन

लोन लेने में इन बुनियादी बातों का ध्यान जरूर रखें

ब्याज दरें: फिक्स्ड या वेरिएबल फिक्स्ड ब्याज दर वाले लोन के मामले में कर्ज की पूरी अवधि तक ब्याज दरें एक ही रहती हैं। वेरिएबल ब्याज दरों वाले लोन में इंटरेस्ट रेट्स मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट्स (MCLR) से जुड़ी होती हैं और इनमें बदलाव होता रहता है।
मौजूदा समय में ब्याज की कम दरों के माहौल को देखते हुए वेरिएबल रेट्स में फायदा आपको तब होता है, जब ब्याज दरें और कम हो जायें। जब आप देख रहे हों कि ब्याज दरों में वृद्धि की आशंका है, तब आपको तुरंत फिक्स्ड ब्याज दर वाले रेट में शिफ्ट हो जाना चाहिए। फिक्स्ड टू वेरिएबल रिजीम में शिफ्ट होना इतना आसान नहीं है। इसमें कुछ खर्च जुड़े होते हैं।

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समय से पहले लोन चुकाना या पार्ट पेमेंट चार्ज: आप किसी लोन को उसकी तय अवधि से पहले चुका सकते हैं। पार्ट पेमेंट के मामले में आप लोन की बकाया रकम का एक हिस्सा चुकाते हैं। लोन लेते वक्त अधिकतर व्यक्ति को यह अंदाजा नहीं होता कि वे समय से पहले लोन चुका सकते हैं या नहीं। सच यह है कि 50 फीसदी से अधिक लोग इस संभावना की तलाश लोन की अवधि के बीच में ही करते हैं। आप यह ध्यान रखें कि आप लोन को समय से पहले चुकाने से संबंधित सभी नियम एवं शर्त से अवगत हैं। अगर लोन समय से पहले चुकाने में कोई चार्ज लग रहा हो तो आप इससे बचने के रास्ते निकाल लें। कुछ लोन में एक साल से पहले इसके पार्ट या प्री पेमेंट की इजाजत नहीं होती।

मॉर्गेज लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम: जब आप कोई बड़ा लोन लेते हैं तो उस मामले में सबसे बुरी स्थिति की कल्पना करें। अगर लोन लेने वाले व्यक्ति की अचानक मौत हो जाती है तो उसके परिवार पर एक बड़ा बोझ आ जायेगा। इस तरह के इंश्योरेंस से आपके परिवार का ना सिर्फ बोझ घटेगा, बल्कि लोन की बाकी रकम भी बीमा कंपनी चुकाएगी। इससे आपके परिवार का भविष्य सुरक्षित बन सकेगा। इसे आप एक बोझ की तरह नहीं बल्कि मदद की तरह लें।

ब्याज बचत स्कीम: बहुत से बैंक मॉर्गेज लोन के साथ फ्लेक्सी स्कीम देते हैं. इसमें आप लोन की रकम चुकाने की जगह अतिरिक्त रकम को बैंक में सेविंग/करंट एकाउंट में जमा कर सकते हैं। यह एकाउंट आपके होम लोन एकाउंट से जुड़ा होता है।

ब्याज की गणना करते वक्त लोन देने वाला बैंक आपके खाते में जमा रकम पर ब्याज नहीं जोड़ता और सिर्फ बकाया मूलधन पर ही ब्याज जोड़ता है, जिससे आप पर लोन का बोझ कम होता चला जाता है। आप अपने खाते में जमा रकम को अपनी जरूरत के हिसाब से निकाल भी सकते हैं।

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सही समय पर बैलेंस ट्रांसफर: अगर आपने हाल में कोई लोन लिया है तो आप बैंक से संपर्क कर लोन पर ब्याज दरें कम करने की गुजारिश कर सकते हैं। अगर आपका बैंक इस पर सहमत नहीं होता तो आप दूसरे बैंक के साथ बैलेंस ट्रांसफर पर विचार कर सकते हैं। इसमें हालांकि आपको कुछ चार्ज देना पड़ सकता है।

लोन लेने से पहले सभी नियम एवं शर्त को ध्यान से पढ़ें. लोन की शर्त को समझे बिना इस प्रक्रिया में तेजी ना दिखाएँ।

Source – ET  से भी

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