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अम्मा को अलविदा कहने से पहले गमजदा हुए लोग

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jayalalitha

बिखरे बाल, अस्त व्यस्त कपड़े। अभी कुछ ही देर पहले विधानसभा के भीतर काफी कुछ घटा उसके साथ। वह विपक्ष की नेत्री थी, उसके साथ असंसदीय-अमर्यादित व्यवहार हुआ। वह गुस्से में कांप रही थी, अचानक वह विधानसभा बाहर निकली और कसम खाई कि वापस तभी लौटूंगी, जब मुख्यमंत्री बन जाऊं या इस सदन को महिलाओं के लिए सुरक्षित बना दूं। दो साल बाद तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव हुए। अघटनीय को अंजाम देने वाली सत्तारुढ़ पार्टी किसी तरह दो सीट जीत पायी। अखबारों ने लिखा, ‘पूरा हुआ द्रौपदी का बदला. यह शुरुआत थी एक.’ ऐसे शुरू हुआ जयललिता जयरामन से ‘अम्मा’ बनने का सफर।

अम्मा के निधन की खबर मिलते ही सैकड़ों शोकाकुल समर्थक अपोलो अस्पताल के बाहर जमा हो गये। लोग अपने प्रिय नेता के गम में फूट-फूट कर रोने लगे।

पिछले 22 दिनों से चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भरती तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता नहीं रहीं। सोमवार रात 11.30 बजे उनका निधन हो गया। 68 साल की जयललिता को रविवार की शाम करीब पांच बजे दिल का दौरा पड़ा। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की। यहां तक कि एम्स, दिल्ली के विशेषज्ञ चिकित्सकों और लंदन के नामी-गिरामी चिकित्सक डॉ रिचर्ड से भी संपर्क किया. लेकिन, उन्हें बचाया नहीं जा सका।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जयललिता के असमय मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी आज श्रद्धांजलि देने चेन्नई भी गये। उधर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रात को ही ट्वीट कर जयललिता के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए बिहार में एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया।

    जयललिता को 22 सितंबर को डिहाइड्रेशन के बाद अस्पताल में भरती कराया गया था। हालांकि, बीच में उनकी तबियत कुछ ठीक हो गयी थी और उनकी पार्टी अन्नाद्रमुक ने तो यहां तक कहा था कि अम्मा जल्द घर लौटेंगी। लेकिन, रविवार की शाम अपोलो अस्पताल ने जो बयान जारी किया, उसने पूरे देश को चिंता में डाल दिया। इसमें कहा गया था, ‘तमिलनाडु की माननीय मुख्यमंत्री, जिनका अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा है, को आज शाम दिल का दौरा पड़ा।’


अम्मा के निधन के समय पर संशय

रविवार से ही अम्मा के निधन की खबरें सोशल नेटवर्किंग साइट पर महामारी की तरह फैलने लगी थी। न्यूज चैनलों ने भी कयासों के सहारे टीआरपी बटोरी, पर सोमवार को जब चेन्नई अपालो से उनके क्रिटीकल कंडीशन की खबर आई, तो अम्मा के समर्थकों में मातम की लहर दौड़ गयी। अन्नाद्रमुक के मुख्यालय में झंडे को भी आधा गिरा लिया गया। इसके बाद सर्मथक, जिसमें महिलाएं ज्यादा थीं ने छाती पीटना और मातम मनाना शुरू कर दिया। हालांकि, कुछ देर के बाद ही शाम करीब पांच बजे झंडे को वापस ऊपर कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन ने भी अम्मा के निधन की बात टाली और कहा कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है। हालांकि, आपोलो की कुछ तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिसमें सभी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मौनव्रत धारण कर अम्मा को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। यह तस्वीर सोमवार की रात करीब नौ से 10 बजे के बीच की है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जयललिता की मृत्यु रात करीब नौ बजे हुई होगी, पर राज्य में शांति व्यवस्था को कायम रखने के लिए उनकी मृत्यु की खबर देर रात को उद्घोषित की गयी।

ऑल इंडिया अन्नाद्रमुक की महासचिव जयललिता करीब चार दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहीं। उन्होंने तमिलनाडु के आम लोगों के दिलों पर राज किया। यही वजह है कि वह अपने वास्तविक नाम से कहीं ज्यादा अम्मा नाम से प्रसिद्ध रहीं।

जयललिता से अम्मा तक का सफर

24 फरवरी, 1948 को कर्नाटक के मैसूर में पैदा हुईं जयललिता अपने जीवन में कई रूपों में सामने आयीं।  चाहे फिल्म अभिनेत्री रही हों या क्रांतिकारी नेता या फिर एक कुशल प्रशासक, जनता ने उन्हें हर रूप में खूब पसंद किया और अपार समर्थन दिया। उन्हें राज्य की पहली सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री और दूसरी महिला मुख्‍यमंत्री बनने का गौरव हासिल था।राजनीति में उनके समर्थक और कार्यकर्ता उन्हें अम्मा (मां) और कभी-कभी पुरातची तलाईवी (क्रांतिकारी नेता) कह कर बुलाते थे। अविवाहित जयललिता ने अपना पूरा जीवन तमिलनाडु को समर्पित कर दिया था। उन्होंने गरीबों के लिए कई योजनाएं चलायी थीं। उनमें अम्मा कैंटीन, अम्मा वॉटर, अम्मा नमक, अम्मा दवाई, अम्मा सीमेंट आदि शामिल हैं।

उनके निधन के बाद सबसे बड़ी चुनौती उनकी उस पार्टी को एकजुट रखना है, जिसकी स्थापना 1977 में एमजी रामचंद्रन ने की थी। जयललिता ने फिल्मी कैरियर की शुरुआत भी रामचंर्दन के साथ की थी, जो बाद में उनके राजनीतिक गुरु भी हुए। 1982 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत रामचंद्रन के साथ की। 1984 में पहली बार उन्हें राज्यसभा का सांसद बनाया गया था। 1987 में वह रामचंद्रन की उत्तराधिकारी बनीं, तो फिर पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा।

अस्पताल में भरती होने के बाद विश्वासपात्र पन्नीरसेल्वम उनका कामकाज देखते रहे हैं. राज्यपाल ने अस्पताल में बैठक की राज्यपाल विद्यासागर राव मुंबई में थे। उन्हें जैसे ही जानकारी मिली, वे दौरा स्थगित कर चेन्नई लौटे और सीधे अस्पताल गये।यहीं पर तमिलनाडु सरकार के मंत्रियों को बुलाया गया। कैबिनेट की आपात बैठक हुई. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फोन पर राज्यपाल से बातचीत की। इसके बाद जयललिता के निधन की घोषणा की गयी। तमिलनाडु में सोमवार को होनेवाली परीक्षाएं स्थगित कर दी गयी हैं और जगह-जगह केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गयी है।

पन्नीरसेल्वम ने संभाली मुख्यमंत्री कमान

तमिलनाडु में जयललिता की तबियत खराब होने के बाद ही भावी मुख्यमंत्री को लेकर कयास लगाये जा रहे थे। उनकी पार्टी में उनके कद के आस-पास का भी कोई नहीं था। हालांकि, उनकी तबियत बिगड़ने के बाद से सारा काम-काज संभाल रहे पन्नीरसेल्वम ने सोमवार की रात करीब 12.30 बजे मुख्यमंत्री की कमान संभाल ली। उन्होंने रात को ही इसकी घोषणा कर दी।

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